भारत रत्न प्रणब दा की भारतीय सियासत में द्वितीय पारी।।

● प्रणब दा की नयी राजनैतिक पारी प्रारंभ हुई साल 1989 से जब उन्होंने अपनी पार्टी का विलय कांग्रेस में कर दिया।
● हम सबने ये सुना ही है कि " जब व्यक्ति का साथ सब छोड़ देते है तो उसका साथ ऊपरवाला देता है" प्रणब के साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ।
● हम बात करेंगे प्रणब की कांग्रेस में वापसी से लेकर राष्ट्रपति के सफर की!!

1.) प्रणब दा की कांग्रेस में वापसी-:
● जब बंगाल के चुनाव के नतीजे प्रणब के पक्ष में नही आएं तो प्रणब का साथ धीरे-धीरे सब साथियों ने छोड़ दिया।
● तब प्रणब ने याद किया अपने असम के पुराने दोस्त को "मोहन संतोष देव" को जिन्होंने प्रणब की बात राजीव तक पहुँचाई।
● संतोष को पता था कि राजीव को मना पाना आसान नही तब संतोष ने "शीला दीक्षित" के साथ मिलकर राजीव को ये बात समझाई की प्रणब का विरोधी खेमे में रहना कांग्रेस के हित में नही।
● राजीव ने त्रिपुरा चुनाव से पहले प्रणब को वहाँ का प्रभारी घोषित किया पर मोहन संतोष देव ने राजीव से कहा कि " आपने सार्वजानिक तौर पर एक अख़बार को दिए साक्षात्कार में प्रणब की आलोचना की थी।"
● अब आप पार्टी महासचिव को भेज प्रणब की कांग्रेस में वापसी करवाएं।
● प्रणब की कांग्रेस में वापसी पर राजीव ने मोहर लगा दी पर राजीव के रहते उन्हे पार्टी में कोई बड़ा पद नही मिला।

              (फोटो सोर्स-: विकिपीडिया)

नरसिम्हा राव वाली कांग्रेस सरकार में प्रणब की भूमिका-:
● साल 1991 में राजीव गांधी की हत्या हुई अब प्रधानमंत्री नरसिम्हा राव थे।
● ये वही राव थे जिनकी प्रणब के साथ जोड़ी खूब जमा करती थी।
● इंदिरा सरकार के खास सिपाहियों में प्रणब- राव का नाम आता था।
● प्रणब को लगा शायद अब उनकी सरकार में वापसी होगी लेकिन प्रणब को यहाँ भी निराशा हाथ मिली और सरकार में कोई भूमिका नही मिली।
● सरकार को कुछ महीने बीते एक दिन नरसिम्हा राव का फ़ोन प्रणब को जाता है और राव कहते है "कितने दिन नाराज रहेंगे आइए और योजना आयोग के उपाध्यक्ष का पद संभालिये।"
● कुछ दिनों के विचार-विमर्श बाद उन्होंने इस पद को स्वीकार कर लिया।
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3.) मनमोहन सरकार में प्रणब की भूमिका-:
● राव सरकार का हिस्सा रहे प्रणब ने तब इस बात का विशेष ध्यान रखा की राव की नजदीकी उन्हे गांधी परिवार से दूर न कर दे।
● वे राव के खास तो बने रहे पर गांधी परिवार से भी उनके अच्छे संबंध रहे।
● अब आया साल 2004 कांग्रेस गठबंधन वाली सरकार अब सत्ता वापसी कर चुकी थी सोनिया का नाम सिहांसी गलियारों में दौड़ा पर उन्होंने अंतिम समय पर प्रधानमंत्री की दौड़ से अपना नाम वापस ले लिया।
● कांग्रेस के संसदीय बोर्ड की मीटिंग होने लगी प्रणब को लगा शायद अब उनका प्रधानमंत्री बनने का वक़्त आ गया है।
● लेकिन प्रणब को एक बार फिर निराशा मिली और मनमोहन को प्रधानमंत्री पद मिला।
● प्रणब के राजनैतिक अनुभव का उपयोग अब कांग्रेस और सोनिया को पता था इसलिए उन्हे मनमोहन सरकार में पहले रक्षा मंत्री और फिर साल 2006 से 2009 तक विदेश मंत्री बनाया गया।
● साल 2009 लोकसभा चुनाव आएं यूपीए ने  सत्ता काबिज़ की।
● प्रणब को इस बार देश का वित्त मंत्री बनाया गया। अब बारी थी देश के 13 वे राष्ट्रपति चुनाव की।
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4.) देश के 13 वे महामहिम बनने की कहानी-:
 2007 में जब लेेफ्ट पार्टियां चाहती थी कि 
प्रणब देश के राष्ट्रपति बने तो सोनिया ने मना कर दिया।
● 2012 में सोनिया जानती थी कि अब 2014 का चुनाव कांग्रेस के लिए जीत पाना मुश्किल है।
● सोनिया ने अपने आवास 10 जनपद पर मीटिंग बुलाई और प्रणब के नाम पर मोहर लगी।
● मीटिंग खत्म होने के बाद पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री प्रेस वार्ता करने आई और बोली यूपीए की तरफ से राष्ट्रपति दावेदार "प्रणब मुखर्जी" होंगे।
● देश स्तब्ध रह गया पहली बार राष्ट्रपति पद के दावेदार की घोषणा सरकार को समर्थित किसी दल की मुखिया ने किया।
● प्रेस वार्ता के बाद ममता मुलायम सिंह यादव के घर पहुँची और ममता ने मुलायम से करीब 2 घंटे तक चर्चा की।
● अब एक और प्रेस वार्ता हुई ममता के बगल की सीट पर बैठे थे मुलायम और दोनों ने राष्ट्रपति के उम्मीदवार के लिए कहा कि राष्ट्रपति तो अब्दुल कलाम ही होने चाहिए।
● इस बार कांग्रेस स्तब्ध रह गई और सोचने लगी जो ममता अभी 2 घण्टे पहले प्रणब के नाम पर मोहर लगा गई उसके सुर बदल कैसे गए।
● सोनिया को चिंता मुलायम की नही थी क्योंकि उन्हे पता था मुलायम के 21 सांसद गए तो मायावती के 20 सांसद आ जाएंगे।
● लेकिन ममता के 31 सासंद की चिंता सोनिया को परेशान कर रही थी।
● प्रणब अब कांग्रेस की साख का सवाल बन गए थे सोनिया ने ममता को छोड़ लेफ्ट की पार्टियों को अपने अंदर मिलाना चालू किया।
● प्रणब के राजनैतिक सम्बन्ध अन्य पार्टियों से भी अच्छे थे सबसे पहले प्रणब का साथ देने उतरी महाराष्ट्र से शिवसेना, शिवसेना ने घोषणा की हम प्रणब को राष्ट्रपति बनाने का समर्थन करते है।
● अब धीरे-धीरे प्रणब की दावेदारी मजबूत होने लगी ममता भी ये बात समझ गई और अंत में प्रणब दा के समर्थन में बंगाली होने की वजह देकर वोट किया।
● चुनाव के नतीजे आये तो प्रणब को 7,13,763 मूल्य के वोट मिले और पीए संगमा को 3,15,787 वोट मिले। 
● देश के 13 वे महामहिम बने श्री प्रणब मुखर्जी।

5.) भारत रत्न प्रणब मुखर्जी-:
● वर्ष 2014 में देश के नए प्रधानमंत्री बने नरेंद्र मोदी।
● अपने तब की चुनावी रैलियों में मोदी ने प्रणब दा के लिए कही बार ये बात कही थी "यूपीए सरकार में देश का प्रधानमंत्री प्रणब दा को होना चाहिए था।
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● हालांकि ये बात मनमोहन सिंह ने भी एक कार्यक्रम में की थी "प्रणब मुखर्जी प्रधानमंत्री बनने के ज्यादा योग्य उम्मीदवार थे पर कांग्रेस सुप्रीमो ने मुझे चुना तो में क्या करता" तब वहां मौजूद मनमोहन की इस बात पर राहुल-सोनिया मुस्कुराने लगे।
● मोदी को पता थी कि उन्हे प्रधानमंत्री बनकर प्रणब दा के साथ मिलकर काम करना होगा।
● साल आया 2015 मोदी का काफिला राष्ट्रपति भवन की और बढ़ा प्रणब से मुलाकात कर मोदी ने बताया कि हम पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी को भारत रत्न देना चाहते है। 
● प्रणब ने हामी भर दी और मोदी से कहा कि अटल जी के अलावा एक और व्यक्ति को भारत रत्न देना चाहिए और मरणोपरांत हो तो ज्यादा अच्छा होगा।
● मोदी ने प्रणब दा की बात मानकर "मदन मोहन मालवीय जी" को भारत रत्न की सूची में शामिल कर दिया।
● समय बीता वर्ष 2017 में देश के 14 वे राष्ट्रपति बनने रामनाथ कोविंद और प्रणब ने राजनीती से सन्यास लेने का ऐलान किया।
● वर्ष 2018 आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने संघ के स्थापना दिवस पर प्रणब दा को संबोधन के लिए न्यौता भेजा।
● प्रणब दा ने न्यौता स्वीकार किया और संघ के कार्यक्रम के लिए नागपुर गए।
● वर्ष 2019 प्रणब को एक दिन प्रधानमंत्री मोदी का फोन आता है मोदी कहते है "प्रणब दा एक बात पर आपकी सहमति चाहता हूं, मैं आपसे मिलकर आपको बताना चाहता था पर अफ्रीका के प्रधानमंत्री आएं है कार्यक्रम तय होने की वजह से नही आ पाया।"
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● प्रणब दा ने कहा कि "आप सहमति किस बात की चाहते है ये नही बताया।"
● प्रधानमंत्री मोदी बोले हम आपको भारत रत्न देना चाहते है प्रणब दा मुस्कुराये और फिर हामी भर दी।

● प्रणब दा 40 साल से एक डायरी लिखा करते थे जिसकी 2 प्रति छप चुकी।
● आखरी प्रति के बारे में वो कहते थे कि ये मेरे मरने के बाद ही छपवाना।
● प्रधानमंत्री बनने के तीन मौके आएं पर शायद किस्मत उन्हे देश का राष्ट्रपति बनाना चाहती हो।
● 31 अगस्त 2020 को प्रणब दा हम सभी को छोड़ पंचतत्वो में विलीन हो गए।
● प्रणब दा की बाते,उनके अनुभव और उनका कौशल सदैव भारत की राजनीती का हिस्सा रहेगा।



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